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गुरुवार, 20 मार्च 2014

इस बार नोटा बटन का प्रयोग भी कर सकेगें मतदाता यदि लगे कि कोई भी उम्मीदवार योग्य नहीं है तो नोटा बटन का प्रयोग करें

लोकसभा चुनावों की रणभेरी बज चुकी है । सभी राजनीतिक दल जनता को अपने अपने वादों के साथ रिझाने को मैदान में कूद चुके है। मतदाताओं को चाहिए कि वे किसी भी राजनीतिक दल के प्रत्याशी की बजाय अपने क्षेत्र से ऐसे उम्मीदवार को संसद में भेजे जो आपके क्षेत्र का सही ढग से प्रतिनिधित्व कर सके । यदि इन चुनावों में प्रत्येक मतदाता ने सही  व योग्य प्रत्याशी को चुनने का संकल्प ले लिया और उसे परिणति तक पहुंचा दिया तो फिर भविष्य मे किसी भी राजनीतिक दल द्वारा प्रत्याशी थोपने की प्रवृति पर अंकुश  लग सकेगा। आखिर हमारी संसद को गरिमा युक्त बनाने के लिए हमें कभी तो शुरूआत करनी ही पडेगी तो इस बार से ही क्यों नहीं हम यह शुरूआत करें ।
और फिर इस बार तो चुनावों में नोटा का भी प्रयोग किया जा सकता है। यदि किसी लोकसभा क्षेत्र के मतदाताओं को ये लगता है कि उनके लोकसभा क्षेत्र में खडे हुए उम्मीदवारों मे से कोई भी उनके हिसाब से  प्रतिनिधित्व करने के योग्य नहीं है तो  मतदाता वोटर मशीन के प्रत्याशियों की सूची के बाद स्थित नोटा के बटन का प्रयोग कर यह बता सकते है कि हमारे क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने की क्षमता किसी भी उम्मीदवार में नहीं है । यदि इस मशीन के नोटा बटन में  उस क्षेत्र में हुए कुल मतदान के 50 प्रतिशत मतदाताओं ने इसका प्रयोग किया तो उस लोकसभा क्षेत्र में दुबारा मतदान कराया जा सकता है । 
जनता को चाहिए कि वह किसी दल धर्म जाति क्षेत्रवाद आदि से उपर उठकर अपने क्षेत्र के लिए योग्य उम्मीदवार को संसद में भेजे ताकि क्षेत्र का विकास हो सके । यदि जनता इस बार भी जागरूक नहीं हुई और उसने योग्य उम्मीदवार का चयन नहीं किया तो राजनीतिक दल इसी तरह उम्मीदवार थोपते रहेगे और आम जनता को पछताना ही पडेगा। नोटा का प्रयोग लोकसभा चुनावों में पहली बार होने जा रहा है यदि जनता ये सोचती है कि किसी भी दल ने योग्य उम्मीदवार नहीं दिया है  या निर्दलियों में भी उनका प्रतिनिधित्व करने की योग्यता नहीं रखता है तो वह नोटा का बटन का अधिकाधिक प्रयोग कर उन्हे नकार सकते है लेकिन यह क्षेत्र में हुए कुल मतदान का कम से कम 50 प्रतिशत अथवा अधिक होना जरूरी है । इससे कम होने पर सबसे अधिक वोट लेेने वाले प्रत्याशी की जीत घोषित की जाएगी ।
ऐसे में जागरूक लोगों व लोकतंत्र को मजबूत करने हेतु कार्य करने वाली संस्थाओं की जिम्मेदारी ज्यादा हो जाती है कि वे जनता को जागरूक कर अपने लिए योग्य उम्मीदवार चुनने के लिए प्रेरित करें । जनता को जागरूक करें और उन्हे ये बताएं कि वे अपने लिए किस उम्मीदवार को चुने अथवा नोटा के बटन का प्रयोग करें । जनता को जागरूक करें कि किसी भी लहर या बहकावे में नहीं आएं सरकार अच्छी तभी बनेगी जब हम अपने क्षेत्र से योग्य और संजीदा प्रतिनिधि को संसद में भेजेगे ।
ऐसी संस्थाओं का यह कर्तव्य है कि वे जनता को जागरूक करें कि यदि हमने किसी व्यक्ति विशेष को प्रधानमंत्री बनाने के लिए मतदान किया और यह भूल गए कि हमे अपने क्षेत्र से एक अच्छे जन प्रतिनिधि को चुनकर भेेजना है तो संसद में जो हम आएं दिन जो तमाशा देख रहे है वह हमें फिर देखने को मिलेगा और देश व अपने क्षेत्र का विकास नही होकर सांसद आपस में जूतमपेजार करते दिखाई देगे

यदि हमें अपनी संसद को शालीन बनाना है तो हमें अपने क्षेत्र से शालीन उम्मीदवार को ही चुनकर भेजना होगा  चाहे वह किसी भी दल का क्यों न हो यहां तक कि निर्दलिय भी क्यों न हो और यदि हमें यह लगता हो कि खडे हुए उम्मीदवारों में कोई भी उम्मीदवार हमारा प्रतिनिधित्व करने के योग्य नहीं है तो हम घर पर नहीं बैठे रहे बल्कि ऐसे में तो हमारा यह कर्तव्य और अधिक हो जाता है कि हम नोटा बटन का अधिकाधिक प्रयोग कर सभी राजनैतिक दलों को यह संदेेश दे कि अब थोपने वाला उम्मीदवार नहीं चलेगा ताकि भविष्य में राजनीतिक दल भी सचेत हो जाए कि यदि किसी भी राजनैतिक दल ने योग्य उम्मीदवार को प्रत्याशी नहीं बनाया तो जनता उसे नकार सकती है ।  लहर के चक्कर में हम अपने क्षेत्र को बरबाद क्यों करें । देश बदल रहा है तो मतदाताओं को भी अपने बदलते मिजाज का अहसास इन राजनैतिक दलों को करा देना चाहिए ताकि देश में साफ सुथरी सरकार का गठन हो सके। यदि मतदाताओं ने इसमे लापरवाही बरती तो आगामी 5 साल तक उसे इंतजार करना पडेगा । इससे अच्छा है कि हम इस मौके को ही क्यो न आजमाएं आखिर कभी तो शुरूआत करनी ही पडेगी तो फिर इस बार से ही क्यों नहीं