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शुक्रवार, 8 अप्रैल 2011

अन्ना का आंदोलन जनता की भावना


       अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार हटाओं मुहिम में हजारों लोग जुड रहे है । केन्द्र सरकार हिलती दिखाई दे रही है । क्योंकि आज भ्रष्टाचार से आम आदमी दुखी है इसीलिए ऐसा कोई व्यक्ति आगे आए तो जनता का उसके साथ होना लाजिमी ही है । आम आदमी भ्रष्टाचार से इतना दुखी हो गया है कि कोई भी काम बिना रिश्वत के नहंी होता । सही और वाजिब कार्य के लिए भी सिफारिश और पैसा दोनो देने पडते है । जनता भीतर ही भीतर इस भ्रष्टाचार से त्रस्त थी जैसे ही जनता की दुखती रग पर कोई हाथ रखकर उसे सहलाने वाला दिखा जनता उसके साथ हो ली । अन्ना का यह आंदोलन जन आंदोलन का रूप लेता जा रहा है गांव शहर सभी उनके साथ जुड रहे हैं वकील डाक्टर राजनीतिज्ञ समाजसेवी युवा वर्ग महिलांए सब कोई अन्ना के साथ खडा दिखाई देता हैं

       आम जनता का साथ तो अन्ना को मिल ही रहा है लेकिन इनके साथ वे भ्रष्ट राजनीतिज्ञ भी अन्ना की इस मुहिम में शामिल होकर अपने को पाक साफ साबित करने में जुटे है जिनके अगर आय के स्त्रोतो की जांच की जाए तो परत दर परत भ्रष्टाचार से कमाई गइ्र्र करोडो की सम्पतिं का खुलासा हो सकता हैं । अन्ना को ऐसे लोगो से अपने आंदोलन से दूर रखना होगा जो भेड की खाल में हैं ।

             वकील भी अन्ना का समर्थन कर रहे है लेकिन यह किसी से छुपा नहीं है कि न्याय के मंदिर में ही सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार है । अदालतों में तारीख पेशी के लिए पेशकारों की क्या खातिरदारी करनी पडती है किसी से छिपा नहीं है  किसी निर्णय की कापी निकलवानी है तो आपको कोर्ट फीस के अलावा नजराना तो देना ही पडेगा । कार्यालयो की कार्य प्रणाली को तो अब हमने मान्यता ही दे दी हैं।

      भ्रष्टाचार उपर से नीचे की ओर चलता है । जब मंत्री अधिकारी भ्रष्ट होते है तो पूरा तंत्र भ्रष्ट होने लगता है । आज हमारे देश में पूरा तंत्र ही भ्रष्ट हो चुका है । उसे अन्ना का आंदोलन कितना समाप्त कर सकेगा कहा नहीं जा सकता लेकिन इस पर अंकुश जरूर लग सकता हैं । लेकिन पवि़त्र आंदोलन की बागडोर उन भ्रष्ट लोगो के हाथ में नही जानी चाहिए जो देश को लूट रहे है और दिखावा ऐसा कर रहे है जैसे उन जैसा कोई पाक साफ है ही नही । जरूरत है ऐसे लोगो को पहचान कर उनको इस पवित्र आंदोलन से दूर रखने की । नही तो अन्ना का यह आंदोलन भी अपनी दिशा से भटक जाएंगा

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