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मंगलवार, 23 अगस्त 2011

कैसे दूर हो भ्रष्ट्ाचार

कैसे दूर हो भ्रष्ट्ाचार

Chandra Prakash Ojha द्वारा 23 अगस्त 2011 को 18:55 बजे पर





देश में भ्रष्ट्ाचार को दूर करने को लेकर अन्ना हजारे के नैतृव में लाखों लोग ही नहीं बल्कि पूरा जन उनके साथ दिखाई देता है । लगता है इस देश की जनता भ्रष्ट्ाचार से इतनी आजीज आ चुकी है जैसे इस बार तो इस भ्रष्ट्ाचार रूपी जंक को उखाड ही फैकेगी। केन्द्रीय सरकार हिल गई है उसे सूझ ही नहीं रहा कि वह इस जन सैलाब से कैसे निजात पाए । सब तरफ अन्ना के जन लोकपाल को पारित करने की गूंज दिखाई दे रही है । खुफिया एजेन्सियां सरकार को चेता रही है कि यदि जल्द ही इस पर पार नहीं पाया गया और इस बीच अन्ना को कुछ हो
गया तो जनता के हाथ के तिरंगे का डंडा सरकार पर ऐसा चलेगा कि वह लाख कोशिश के बाद भी बच नहीं पाएगी ।


छोटे छोटे कस्बों में भी लोग अन्ना के जन लोकपाल बिल के समर्थन में है । स्वतःस्फूर्त रैलियां निकाल रहे है । कोई केंडिल मार्च कर रहा है तो कोई कुछ और । यानि हर तरफ भ्रष्ट्ाचार मिटाने के लिए जनता अन्ना के साथ है । ऐसा लगता है कि जनता अन्ना के साथ मिलकर इस पर आर पार की लडाई के मूड मे है । कोई कहता है इतना जन सैलाब तो महात्मा गांधी के आंदोलन के समय दिखाई दिया था तो कोई इसकी तुलना जय प्रकाश नारायण के आदोलंन से कर रहा है । वास्तव मे ऐसा दिख रहा है कि इस बार इंकलाब आकर ही रहेगा ।


लेकिन इस जन सैलाब के दूसरे पक्ष को आप देखेगें तो आपको यह एक भीड तंत्र दिखेगा जो बिना सोचे समझे अन्ना के साथ है उसकी मन की भावना अन्ना की तरह साफ नही है । हॉ जनबा धारा के विपरित आपको यह बात कुछ अटपटी लगेगी क्योंकि जब सब तरफ एक ही बात हो और उसके विपरित कोई बात कही जाएं तो या तो उसे विरोधी कहा जाता है या फिर पागल । लेकिन मै आपको एक ऐसी हकीकत से अवगत कराता हूं जिससे सुनकर आप वास्तव में मानेगे कि अभी भारतवासी भ्रष्ट्ाचार से इस देश से बिदाई नही चाहते है । ये जो जन सैलाब दिख रहा है वह वास्तव में उन स्वतंत्रता सेनानियों के जोश वाला नहीं है जिन्हें सिर्फ आजादी चाहिए थी। यहॉ इस भीड तंत्र को अभी भ्रष्ट्ाचार मुक्त देश नहीं जरूरत महसूस नहीं र्हुइं है । हॉ आग जलती दिखाई देने लगी है लेकिन इस आग में जलने को आम नागरिक अपने को पूरी तरह तैयार नहीं कर पाया है ।


जब तक पूरे मन से भ्रष्ट्ाचार को हटाने का जनता का मानस नहीं बनेगा तब तक यह समाप्त नहंी हो सकता । अभी उसमें देर दिखाई देती है । अन्ना लाख कोशिश कर ले अभी वह समय नहीं आया है । वे पिछले आठ दिन से अनशन पर बैठे है जनता का समर्थन भी है लेकिन अन्ना हजारे जी आप माने या माने जनता ने मन से इसे हटाने का मानस अभी नहीं बनाया है जिस दिन ये पूरा हो जाएगा उस दिन ये भ्रष्ट्ाचार नौ दो ग्यारह हो जाएगा । लेकिन इसके लिए जनता को अपना मन बनाना होगा ।


अभी कल ही मैं एक टी वी चैनल देख रहा था। भारी भीड के बीच मीडिया वाले लोगो का इन्टरव्यू दिखा रहे थे। कोई बता रहा था कि वे रात दो बजे तक ड्यूटी पर थे और सुबह पांच बजे चलकर अन्ना के समर्थन मे आ पहुचे है तो कोई साईकलों पर बैठकर अन्ना का साथ देने आ रहे है । इसी बीच मैने कुछ लोगो का इन्टरव्यू देखा जिसमे वो बता रहे थे कि वे अन्ना को समर्थन देने बहुत दूर से आए है यहां तक कि उन्हें रेल में रिर्जेवेशन नहीं मिला तो भी उन्होने टीटी को एक हजार रूपये अलग से देकर अन्ना को समर्थन देने आए है यानि उनमे इतना उत्साह था कि अन्ना को समर्थन देने के लिए रिश्वत देकर आएं हांलाकि उनकी यह भावना अन्ना के प्रति उनके सम्मान को प्रकट करती
है लेकिन इसके पीछे एक बात वह छोड र्गए है कि हमारा मानस किस जूनून तक येन केन अपने मकसद को पूरा करना है । जिस भ्रष्ट्ाचार को समाप्त करने के लिए अन्ना अनशन पर बैठे है उसे ही बढावा देकर वे अन्ना को समर्थन देने आ पहुंचे है । गहराई से सोचना होगा कि क्या इस तरह से देश भ्रष्टाचार से दूर होगा ।


एक और बात बताता हूं आपको कल ही मुझे बस से बाहर जाना पडा । तीन चार युवक भी उसी बस मे थे । कडक्टर टिकट काट रहा था । साथ ही वह यात्रियों से पूछ रहा था टिकट दूं क्या । किसी ने हां कि तो पूरे पैसे लिए और टिकट दे दिया । किसी ने ना की तो कुछ कम पैसे लिए और टिकट नहीं दी टिकट के पैसे अपनी जेब मे डाल लिए । उन युवकों की बारी आई । वे मेरे आगे वाली सीटो पर बैठे थे उनमे से एक ने सभी का किराया दिया । कडक्टर रूपये लेकर आगे बढ गया । युवको हलचल हुई । अन्ना की बाते होने लगी । कोई बोला अन्ना तो भ्रष्टाचार मिटाने के लिए अनशन पर बैठे है और देखो ये कडक्टर इस माहोल मे भी डकार रहा है । युवकों में जोश आया उन्होने कडक्टर को
बुलाया और बोले भाई साहब टिकट दिजिए । कडक्टर बडी ही ईमानदारी से बोला किसने मना किया लाओ चौदह रूपये और दो टिकट बना देता हू । युवकों को ऐसा लगा जैसे उसने उनकी पूरी जेब के पैसे ही मांग लिए हो । वे दुबारा टिकट नहीं मांग सके । कुछ देर कडक्टर इस इंतजार में उनके पास खडा रहा कि शायद उनमे से कोई चौदह रूपये दे तो वह टिकट बना दे । उन युवकों मे से किसी ने रूपये दिये नहीं और कडक्टर बिना कुछ बोले चुपचाप आगे बढ गया ।


मुझे लगा इस देश से अन्ना अकेले भ्रष्ट्ाचार दूर कर सकेगे जब तक इस देश की जनता मन से इसे दूर करने का संकल्प नहीं लेती तब तक कोई अन्ना हजारे कुछ नही कर सकता । हम अपने स्वार्थ के लिए वह सब करने को तैयार है जो हमें भ्रष्ट्ाचार दूर करने के लिए नहीं करना चाहिए ।


लेकिन ये दो उदाहरण ये सिद्ध करते है कि ये प्रवृति ही हमारे भ्रष्ट्ाचार की जड है। जब अपने आराम की बात आई तो उन महाशयों ने कष्ट सहने की बजाय टीटी को रिश्वत देकर अपने आराम का इंतजाम करने मे ही भला समझा वे ये भी भूल गए कि वे जिस व्यक्ति के पवित्र आंदोलन को समर्थन देने जा रहे है वह इस बुर्राइं से लडने के लिए ही पिछले आठ दिनों से अनशन पर बैठा है । यही नहीं युवा पीढी ने केवल अपने चौदह रूपये बचाने के लिए कडक्टर को करीब 80 रूपये हजम करने की मौन इजाजत दे दी ।


मेरा मन उस शख्स के प्रति गद्गद् हो गया कि वो कितने भुलावे में आकर इस भीड तंत्र को देखकर आल्हादीत हो रहा है कि देश की जनता उसको कितना प्यार समर्थन सम्मान दे रही है कि वह इसके एवज मे अपनी जान देने को तैयार है और दूसरी तरफ वही जनता यू तो उनके साथ खडी दिखाई देती है लेकिन जब अपने व्यक्तिगत स्वार्थ या आराम की बात आती है तो यू टर्न लेकर उस विपरित आचरण करने से भी नहीं हिचकतीं ।


इन दो उदाहरणो से मुझे लगा कि अभी देश भ्रष्ट्ाचार से मुक्त होने के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं हुआ है । जिस दिन हर व्यक्ति पूरे मन से इसे दूर करने की ठान लेगा उस दिन किसी जन लोकपाल की जरूरत ही नहीं रहेगी या फिर तभी जन लोकपाल प्रभावी हो सकेगा

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