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शुक्रवार, 26 अगस्त 2011

जन लोकपाल बिल का नागरिक चार्टर

अन्ना हजारे ने अपने अनशन को समाप्त करने के लिए जिन तीन मांगो को संसद द्वारा आज ही सहमति देने की शर्त लगाई है उनमे प्रत्येक राज्य मे लोकायुक्त की व्यवस्था करने सभी सरकारी कर्मचारियो को लोकपाल के दायरे मे लाने व सिटीजन चार्टर की व्यवस्था

करना शामिल है । नागरिक चार्टर कैसा हो इस पर सिविल सोसाईटी ने अपने जन लोकपाल बिल मे जो सिटीजन चार्टर यानि नागरिक चार्टर प्रस्तुत किया है वह इस प्रकार है । वे चाहते है कि जो लोकपाल बिल पारित संसद द्वारा पारित किया जावे उसमे इस चार्टर के
अनुसार हर विभाग मे कार्य निर्धारित अवधि मे हो यदि ऐसा न हो तो उसे भ्रष्टाचार की श्रेणी मे माना जावे । प्रत्येक बुद्धिजीवी वर्ग मीडिया प्रशासनिक अनुभव रखने वाले वकीलो सामाजिक कार्यकर्ताओ से मेरा निवेदन है कि इस पर चिन्तन कर अपने विचार दे ताकि इस नागरिक चार्टर को और प्रभावी बनाया जा सके प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह देश के लिए जो सर्वश्रेष्ठ हो उसके लिए अपने विचार व्यक्त करे यदि उसमेकोइ अच्छी बात हो तो वह एक अच्छे चार्टर मे शामिल होने से वंचित क्यो रहे ।


नागरिक चार्टर जन लोकपाल बिल

सभी सरकारी विभागों को एक नागरिक चार्टर ;घोषणा पत्र तैयार करना होगा, जिसमें यह लिखा होगा कि कौन सा अधिकारी जनता का कौन सा काम कितने दिन में पूरा करेगा। जैसे- कौन सा अफसर राशन कार्ड बनायेगा, कौन सा अफस पासपोर्ट बनायेगा और इनको बनाने में कितना वक्त लगेगा।


अगर चार्टर का पालन नहीं किया जाता, तो कोई भी व्यक्ति उसके खि़लाफ उस विभाग के मुखिया के पास शिकायत कर सकेगा। विभाग का मुखिया जन शिकायत अधिकारी (पीजीओ के रूप में कार्य करेगा।

पीजीओ को शिकायत का निपटारा अधिकतम 30 दिनों में करना होगा।


अगर शिकायतकर्ता पीजीओ के काम से संतुष्ट नहीं होता है, तो वह इसकी शिकायत सीधे सतर्कता अधिकारी यानि विजिलेंस अफसर, से कर सकता है।


जन लोकपाल के पास हर जिले में एक सतर्कता अधिकारी और लोकायुक्त के पास हर प्रखंड यानि ब्लॉक में एक सतर्कता अधिकारी होगा।


ऐसी शिकायतों में यह मान लिया जाएगा कि इनमें रिश्वतखोरी का मामला बनता है। सतर्कता अधिकारी को-
30 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता का काम करवाना होगा। व दोषी अधिकारियों पर जुर्माना लगाना होगा, जो शिकायतकर्ता को मुआवज़े के रूप में मिलेगा। व दोषी अधिकारी के ख़िलाफ भ्रष्टाचार की कार्यवाही शुरु की जायेगी।


यदि कोई नागरिक सतर्कता विभाग की कार्यवाही से संतुष्ट नहीं होता है तो वह जन लोकपाल या जन लोकायुक्त के मुख्य सतर्कता अधिकारी यानि चीफ विजिलंेस अफसर ;सी.वी.ओ. के पास अपील कर सकेगा।


किसी विभाग के अधिकारी के खिलाफ लगे आर्थिक या विभागीय दंड के विरूद्ध उच्च न्यायालय में अपील की जा सकेगी।


हमारा मानना है कि जब किसी विभाग के प्रमुख के ऊपर कुछ जुर्माने लगाए जाएंगे, तो वह उचित व्यवस्था लागू करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में ऐसी शिकायतें न आये।


जन लोकपाल/लोकायुक्त के तहत नागरिक अधिकार पत्र ;नागरिक घोषणा पत्र या सिटिज़न चार्टरद्ध के उल्लंघन से संबंधित जन शिकायतों का निवारण कैसे किया जाएगा?
फ्लो.चार्ट


1 नागरिक सिटिज़न चार्टर के अनुसार संबंधित अधिकारी को कार्य कराने के लिए संपर्क करेगा।

यदि कार्य संतोषजनक रूप से निश्चित समयावधि में पूरा नहीं किया जाता है तो


2 नागरिक जन शिकायत अधिकारी को शिकायत करेगा।


यदि शिकायत का निपटारा 30 दिन में नहीं होता जाता। नागरिक जन लोकपाल,जन लोकायुक्त के सतर्कता अधिकारी
को शिकायत करेगी।


3 सतर्कता अधिकारी शिकायत प्राप्त होने के 30 दिन के भीतर दोषी अधिकारी पर जुर्माना लगाएगा जो उसे पीड़ित व्यक्ति को हर्जाने के
रूप में देनी होगी। वह उस पर भ्रष्टाचार की कार्यवाही भी शुरू करेगा।


यदि पीड़ित व्यक्ति अब भी असंतुष्ट हो

4 मुख्य सतर्कता अधिकारी को अपील।

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